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क्षेत्र के स्थानीय समुदाय के अनुसार, साईं बाबा मंदिर की स्थापना साईं बाबा की सेवा और भक्ति से प्रेरित भक्तों द्वारा हुई मानी जाती है। परंपरा के अनुसार, इस स्थान पर पहले कोई छोटी समाधि या स्मारक था जिसे स्थानीय श्रद्धालुओं ने समय के साथ विस्तारित किया। स्थानीय मान्यता के अनुसार, साईं बाबा की कृपा से क्षेत्र में कठिनाइयों का समाधान हुआ और उसी आभास से यह स्थान सामुदायिक पूजा का केन्द्र बन गया।
क्षेत्र के मध्य में स्थित साईं बाबा मंदिर, बikaner की एक पवित्र स्थापना है। इस मंदिर की विशेषता है कि यह साईं बाबा की सेवा और भक्ति से प्रेरित है, जिसके कारण यह स्थान सामुदायिक पूजा का केन्द्र बन गया है। मंदिर का निर्माण स्थानीय पंडितों और समाजसेवियों के योगदान से हुआ होगा, लेकिन सटीक तिथि या संस्थापक का नाम प्रमाणित करना कठिन है। मंदिर की प्रसिद्धि स्थानीय समाचार-पत्रों और मौखिक परम्परा में देखी जा सकती है।
किसी स्थानीय समुदाय के आत्मीय प्रयासों से स्थापित साईं बाबा मंदिर का दौरा करने के लिए सबसे अच्छा समय सुबह की शुरुआत या शाम की समाप्ति में होता है, जब दिन की गर्मी से बचने के लिए है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, मंदिर के प्रवेश क्षेत्र में कदम निकालने के लिए पैर की जूती निकाल देना चाहिए। स्थानीय लोगों की संस्कृति और संस्कारों के अनुसार, मंदिर में प्रवेश करने से पहले स्थानीय पोशाक पहनना चाहिए, जिसमें कंधे और घुटने कवर हों। मंदिर के निकट स्थित स्थानीय बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन से स्थानीय टैक्सी या ऑटो-रिक्शा से मंदिर का दौरा किया जा सकता है।
यह साईं बाबा मंदिर की स्थापना स्थानीय समुदाय के आत्मीय प्रयासों से सम्भवतः बीते कुछ दशकों में हुई मानी जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह मंदिर उन भक्तों द्वारा बनवाया गया जो साईं बाबा की सेवा और भक्ति से प्रेरित थे। सामुदायिक पूजा के लिए यह स्थान केन्द्र बन गया है, जहां स्थानीय श्रद्धालुओं की पूजा और साधना होती है। मंदिर के निर्माण में स्थानीय पंडितों और समाजसेवियों का योगदान रहा होगा। स्थानीय समाचार-पत्रों और मौखिक परम्परा में इसकी प्रसिद्धि देखी जा सकती है।