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पिराना मंदिर की परम्परा है कि इस स्थान को देवी माता के शaktipeeth के रूप में माना जाता है। स्थानीय विश्वास है कि माता के पैर का एक अंग यहाँ स्थापित है, जिसके कारण इस स्थान को पवित्र माना जाता है। लोगों का मानना है कि माता के पैर के अंग की पूजा से प्राप्त होने वाले लाभ और संतोष की प्राप्ति होती है।
पिराना मंदिर, चमपनर-पवागढ़ के समीप स्थित, एक प्राचीन और सुंदर हिन्दू मंदिर है। इसकी विशेषता इसके स्थापत्य की है, जिसमें स्तूपाकार शिखर, सुडौल स्तंभ और सुंदर नक्काशी है। पिराना मंदिर की महिमा इसके स्थान के कारण है, जो चमपनर किले से सटा हुआ है। यहाँ से निकलने वाला दृश्य चमपनर की सुंदरता को प्रदर्शित करता है।
चमपनेर-पवागढ़ के पिराना मंदिर के लिए सबसे अच्छा समय सुबह की सैर के लिए होता है। पवागढ़ की चढ़ाई से पहले मंदिर का नज़ारा देखकर, सूरज के नीचे सैर करने के लिए प्रेरित होता है। प्रात:काल के दौरान मंदिर के पास सड़क के नज़ारे और स्थानीय लोगों के साथ मिलना संभव है। साफ कपड़े और आरामदायक जूते लेकर जाना अच्छा है, क्योंकि मंदिर के पास सड़क के नज़ारे हैं। मंदिर के लिए सबसे अच्छा मार्ग पवागढ़ से नीचे की सड़क से है, जो सड़क के नज़ारे और स्थानीय लोगों के साथ मिलना संभव है।
पिराना मंदिर में पूजा की प्रथा साधारणतः स्त्री देवता की पूजा से जुड़ी हुई है। स्त्री देवता की पूजा में स्त्री के रूप में प्रतिनिधित्व किया जाता है, जिसका संदर्भ स्त्री की शक्ति और स्त्री के स्वामित्व के साथ जोड़ा जाता है। पूजा में स्त्री के रूप में प्रतिनिधित्व किया जाता है, जिसका संदर्भ स्त्री की शक्ति और स्त्री के स्वामित्व के साथ जोड़ा जाता है।