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सीतावणी का मंदिर, जिसका नाम सीता के नाम पर रखा गया है, एक पवित्र स्थान है जहां सीता माता अपने पुत्र लव और कुश के साथ ठहरे थे। यह माना जाता है कि माता सीता ने इस स्थान पर कुछ समय बिताया था। स्थानीय मान्यता है कि माता सीता ने अपने पुत्रों के साथ यह स्थान काफी समय तक ठहराया था, और इसके लिए एक मंदिर निर्माण कराया गया था।
कोर्बेट टाइगर रिज़र्व के सितवानी ज़ोन में स्थित सितवानी मंदिर का निर्माण सीता गoddess के सम्मान में किया गया है। इस मंदिर की विशेषता इसकी सुंदर वास्तुकला है, जो पूरे विश्व से लोगों को आकर्षित करती है। मंदिर के आस-पास जंगली जानवरों की विविधता है, जिसमें जैकल्स, वाइल्ड बोर्स, बarking डियर, लेपर्ड्स, टाइगर्स, इलेफेंट्स, और किंग कोब्रा शामिल हैं।
कॉर्बेट में सीतावनी की यात्रा में सबसे अच्छा समय दोपहर के बाद है, जब सूरज नीचे आता है और सूर्यास्त के पास होता है। इस समय, सीतावनी के प्राकृतिक सौंदर्य को पूरी तरह से देखा जा सकता है। सीतावनी की यात्रा के लिए सबसे अच्छा वस्त्र साफ और हल्का होना चाहिए, जिसमें से आपको आराम से घूमने की सुविधा मिलेगी। सीतावनी की यात्रा के लिए सबसे अच्छा तरीका स्थानीय सूत्रों से पूछना है, क्योंकि सीतावनी के लिए सटीक समय और शुल्क की जानकारी मिलना चाहिए।
सीतावणी मंदिर में पूजा से संबंधित प्रथाएं सामान्य रूप से संस्कारों से संबंधित होती हैं। साधारण रूप से भक्तजन यहां पूजा के लिए आते हैं, जिसमें सीता गoddess की पूजा की जाती है। मंदिर के पास सीता के पुत्र लुव और कुश के मूर्ति हैं, जो संस्कार के अनुसार स्थापित हैं। सीतावणी मंदिर की विशेषता इसकी स्थानिक जलधारा और सुन्दर कुणाले हैं, जो इसके सौंदर्य को और बढ़ाते हैं।