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कहाना है कि मोहिनिश्वर मंदिर की स्थापना महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया ने 1915 में की थी। उनके पति महाराजा हरि सिंह के निर्देश पर इस मंदिर का निर्माण किया गया था। लोकप्रिय विश्वास है कि इस मंदिर का निर्माण स्थानीय सामग्री से किया गया था, जिसके कारण इसका सौन्दर्य और स्थानीय संस्कृति का सम्मान है। कहाना है कि इस मंदिर के पास एक विशेष स्थान है, जहाँ शिवजी के दर्शन के लिए पूजारी आते हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में शिवजी की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गुलमर्ग के मोहिनीश्वर मंदिर की स्थापना 1915 में महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया ने की थी, जो उस समय जम्मू और कश्मीर के महाराजा हरि सिंह की पत्नी थीं। यह मंदिर टिन रूफ से बना हुआ था, जो एक बार बहुत खराब स्थिति में था लेकिन 2021 में भारतीय सेना और स्थानीय निवासियों की मदद से इसका पुनर्निर्माण किया गया था। अब यह मंदिर पुनर्नवीन और पूजार्थियों के लिए खुला है। इस शिव मंदिर को रानी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
गुलमर्ग के नजदीक स्थित मोहिनीश्वर मंदिर की यात्रा में सबसे अच्छा समय सुबह का होता है। मंदिर के लिए जाने के लिए सड़क मार्ग से जा सकते हैं, जिसके लिए स्थानीय टैक्सी या ऑटो सेवा का उपयोग किया जा सकता है। मंदिर के पास पार्किंग सुविधा उपलब्ध है, लेकिन स्थानीय लोगों से सलाह लेना अच्छा होगा क्योंकि मंदिर के लिए प्रवेश की समय और शुल्क प्रत्येक दिन अलग-अलग हो सकते हैं। मंदिर के अंदर पूजा के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन स्थानीय लोगों से सलाह लेना अच्छा होगा क्योंकि पूजा के समय और शुल्क की जानकारी प्राप्त करने के लिए स्थानीय लोगों से संपर्क करना चाहिए।
कश्मीर के गुलमर्ग में स्थित मोहिनीश्वर मंदिर का प्रवेश स्तंभ से ही शुरू होता है। यहां के पुजारी साधुओं का स्वागत करते हैं, जिन्हें साधारण लोगों से अलग संस्कृति की झलक मिलती है। मंदिर के अंदर स्तब्ध होकर रह जाते हैं, जहां शिवजी की पूजा होती है। साधुओं की सेवा में लीन होकर रह जाते हैं, जो मंदिर की संस्कृति को जीवंत बनाते हैं।



