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कोट्टे का संरचनात्मक स्वभाव पूरी तरह से केरल के स्थानिक शिल्प से प्रेरित है। इसका निर्माण किया गया है एक स्टाइल टिपिकल ऑफ़ साउथ इंडियन पैलेस, जिसमें स्थानिक सामग्री जैसे कच्चा पत्थर, सीमेंट, और लकड़ी का प्रयोग किया गया है। कोट्टे की लAYOUT काफी बड़ी है और इसके भीतर कई स्थान हैं, जिसमें प्रमुख रूप से एक बड़ा मैदान है, जहाँ शेरनी हाथी प्रशिक्षण और संभालने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कोट्टे के साजिश का स्टाइल स्थानिक है और इसके साथ हाथी संस्कृति से जुड़ा हुआ है।
कोट्टपाडी के निकट स्थित पुन्नथुर कोट्टा एक प्राचीन किले और पूर्व में राजमहल है। यह स्थान स्थानीय विश्वास के अनुसार, भगवान गुरुवायुरप्पन के लिए प्रस्तुत किया गया है। कोट्टा के भीतर स्थित होने के कारण, यह एक सांस्कृतिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत है, जहाँ आप हाथी, स्नान, भोजन और प्रशिक्षण देख सकते हैं। स्थानीय विश्वास के अनुसार, यह स्थान पवित्र है, जहाँ भगवान के लिए प्रस्तुत किया गया है।
कोट्टे की पुरानी चहारदारी में स्थित पुन्नथुर कोट्टा एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसका महत्व केरल की संस्कृति और प्राचीन इतिहास से जुड़ा हुआ है। यह स्थल गुरुवायूर के प्रसिद्ध श्री कृष्ण मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित है, और इसकी स्थिति के कारण ही इसकी सुंदरता और ऐतिहासिकता को देखा जा सकता है। पुन्नथुर कोट्टा एक सांस्कृतिक अनुभव है, जहाँ आप हाथी देख सकते हैं, जो मंदिर के लिए पूजा और प्रक्रिया में उपयोग किए जाते हैं।
कोट्टे की यात्रा के लिए सुझाव पुन्नाथुर कोट्टे की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय सुबह की सैर (9 बजे से 11 बजे) या शाम की सैर (3 बजे से 5 बजे) है, जब हाथी सबसे सक्रिय होते हैं। कोट्टे के अंदरूनी हिस्से की सैर के लिए प्राकृतिक वस्त्र पहनें और कोम्फर्टेबल जूते पहनें। सूरज की रोशनी से बचने के लिए सनग्लास और सनहैट लेकर जाएं। कोट्टे की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय सुबह की सैर के लिए जाएं, जब सूरज निकला है और हाथी सबसे सक्रिय होते हैं।