Swamarg

Shri Pujya ni Tunk

📍 Near Samavasaran, Palitana

SACREDJain Tirth✓ Cross-checked
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Story

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Tradition says

पुज्य नी टंक की स्थिति में एक पवित्र स्थान है, जिसका संबंध जैन धर्म से है। स्थानीय विश्वास के मुताबिक, यह स्थान श्री पुज्य नी टंक के नाम से जाना जाता है, जिनके कार्यों ने जैन धर्म के लिए एक नया अध्याय खोला। यहां के लोग मानते हैं कि श्री पुज्य नी टंक ने यहां के लिए एक पवित्र स्थान का निर्माण किया है, जिसमें जैन साधुओं के लिए एक सुरक्षित स्थान मिला। स्थानीय परम्परा के मुताबिक, यह स्थान पूजा के लिए एक स्थान है, जहां जैन साधुओं को पूजा के लिए आना चाहिए।

Historians say

पलिताना के समीप स्थित श्री पूज्य नी टंक एक पवित्र स्थल है, जिसका महत्व जैन धर्म के लिए काफी है. यहां स्थित है एक समूह के सात स्तूप, जिनका निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था. इन स्तूपों का निर्माण स्थानीय शिल्पकारों ने किया था, जिनकी कारीगरी की प्रशंसा की जाती है. टंक के पास स्थित है एक सुंदर मंदिर, जिसमें स्थित है एक प्रतिमा जिसका नाम स्थानीय लोगों ने 'नी टंक' कहा है. इस स्थल का महत्व यह है कि यहां स्थित है एक पवित्र स्तूप जिसका नाम 'नी टंक स्तूप' है, जिसमें स्थित है जैन धर्म के प्रसिद्ध संत की प्रतिमा.

Historians say

पुज्या नी टंक के लिए प्रार्थना करने के लिए सबसे अच्छा समय सुबह के दिन में होता है, जब सूरज निकलता है और सूरज के प्रकाश में पुज्या की मूर्ति का सौंदर्य सामने आता है। प्रार्थना करने के लिए सबसे अच्छा कपड़ा सादा और साफ कपड़ा होता है, जिससे आपका मन शांत हो। प्रार्थना स्थल के लिए सबसे अच्छा पहनावा सादा और साफ कपड़ा होता है, जिससे आपका मन शांत हो। पुज्या नी टंक के लिए सबसे अच्छा पहनावा सादा और साफ कपड़ा होता है, जिससे आपका मन शांत हो।

Tradition says

पुज्य नी टंक के प्रार्थना स्थल में साधुओं की पूजा से संबंधित होता है। यहाँ साधुओं की पूजा से संबंधित होता है। साधुओं की पूजा से संबंधित होता है।

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