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किसी स्थान की मान्यता में संगमेश्वर मंदिर की प्रास्था है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस मंदिर की निर्माण की स्थिति में संगमेश्वर के प्रति किंवल्य की पूजा होती है। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार, संगमेश्वर मंदिर का निर्माण चालुक्य राजा विजयादित्य सत्यश्राय ने करवाया था। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस मंदिर की सкульप्चर्स में उग्रनरसिम्हा और नटराजा के चित्र हैं, जो इसके विशेष स्थान की मान्यता को दर्शाते हैं।
हिंदी में: पट्टदकल के संगमेश्वर मंदिर एक पवित्र स्थल है जो चालुक्य काल के सबसे अच्छे नमूने है। यह मंदिर पट्टदकल का सबसे पुराना मंदिर है जिसका निर्माण चालुक्य राजा विजयदित्य सत्यश्राय ने किया था। मंदिर के बाहरी दीवार पर उग्रनरसिम्हा और नटराजा के सкульप्टर्स हैं। मंदिर हॉल और छत का डिजाइन संगमेश्वर और विरुपाक्ष मंदिर के समान है। मुख्य विमान तीन मंजिला है और निचले मंजिले को दो दीवारों से घिरा है।
पट्टदकल के संगमेश्वर मंदिर की यात्रा के लिए सुझाव पट्टदकल के संगमेश्वर मंदिर की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय दिन के मध्य है, जब सूरज की रोशनी मंदिर के सкулप्टर्स और मूर्तियों को अच्छे से दिखाती है। मंदिर के अंदर प्रवेश करने से पहले कृपया अपने सวม को सुरक्षित रखें और किसी भी सामान को लेकर न जाएं, क्योंकि मंदिर के अंदर कोई सामान की अनुमति नहीं है। मंदिर के बाहर से ही इसकी सुंदरता का आनंद लें और संगमेश्वर मंदिर की प्राचीन सкулप्टर्स और मूर्तियों को देखें।
क्रिया संगमेश्वर मंदिर में साधारण रूप से होती है। यहाँ के मार्गदर्शकों का मानना है कि साधारण रूप से यहाँ के मार्गदर्शकों का मानना है कि साधारण रूप से पूजा संगमेश्वर मंदिर में होती है।
