Swamarg
📷 Aja Nitai das
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Ahulya Math

📍 Near Jagannath Ballav Mutt (Srikshetra Heritage site), Puri

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Story

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Tradition says

अहुल्या मठ के बारे में लोककथा है कि यह स्थान सृष्टि के आरंभ से ही पवित्र माना जाता है। स्थानीय विश्वास है कि इस स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है। लोककथा है कि इस स्थान पर संत और साधु आत्मसात हुए हैं और उनकी आत्मा का साक्षी यह स्थान है। स्थानीय विश्वास है कि इस स्थान पर पूजा और भक्ति की क्रिया होती है और साधु-संतों की कृपा से लोगों को मोक्ष मिलता है।

Historians say

अहुल्या मठ पुरी के प्राचीन नगर के मध्य स्थित एक पवित्र स्थल है, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसका नाम अहुल्या मठ क्योंकि यह स्थान संस्कृत साहित्य में वर्णित एक प्रसिद्ध स्त्री अहुल्या के नाम पर रखा गया है। यह मठ पुरी के प्राचीन संस्कृति का एक उदाहरण है, जिसमें संस्कृति के साथ-साथ सौंदर्य और साहस का संगम है। एक यात्रा स्थान के रूप में, अहुल्या मठ की सुंदर प्राकृतिक स्थिति और पवित्र वातावरण के कारण इसका दौरा करना एक अनुभव के लिए है।

Historians say

अहुल्या मठ की यात्रा में सबसे अच्छा समय दोपहर के दौरान होता है, जब सूरज की रोशनी मठ के भव्य स्तूपों को चमका देती है। सुविधाजनक कपड़े और पानी के साथ जाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि मठ के चारों ओर सड़कें काफी लंबी हैं। मठ का प्राथमिक स्थान पुरी के मध्य में स्थित है, इसलिए सड़क के द्वारा प्राप्त होने का सबसे अच्छा तरीका है। सुविधाजनक साधनों के माध्यम से मठ की यात्रा की पुष्टि के लिए मोबाइल एप का उपयोग करें।

Tradition says

अहुल्या मठ के प्रांगण में स्तिथ होने के कारण इस स्थान को पुण्य स्थान माना जाता है। यहां की पूजा में स्त्री और पुरुष दोनों की भागीदारी होती है। साधु-संतों की उपस्थिति में स्त्री और पुरुष दोनों ने अपने संकल्प को पूरा कर लिया है। यहां की पूजा में स्त्री और पुरुष दोनों की भागीदारी होती है। पूजा के लिए साधन सामग्री की आवश्यकता नहीं है। साधु-संतों की उपस्थिति में पूजा की प्रक्रिया होती है।

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