Story
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कहानी है कि अन्जुमन-ए-हайдरी इमाम बargaah मस्जिद का निर्माण हैदरी के संत साहब के नेतृत्व में हुआ था। स्थानीय विश्वास है कि संत साहब ने इस स्थान पर एक पवित्र स्थान का निर्माण किया था, जहां मुस्लिम और हिन्दू दोनों के लिए एक सामान्य स्थान था। कहानी है कि संत साहब ने इस स्थान पर एक पवित्र स्तूप का निर्माण किया था, जिसमें अल्लाह की पूजा की जाती है। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस स्थान पर अल्लाह की पूजा की जाती है, और लोग यहां की प्रार्थना में शामिल होते हैं।
कश्मीर के सांस्कृतिक और धार्मिक पटल पर एक उल्लेखनीय स्थल, अन्जुमन-ए-हайдरी इमाम बारगाह मस्जिद कश्मीर के सांस्कृतिक और धार्मिक पटल पर एक उल्लेखनीय स्थल है। इसका निर्माण 19वीं शताब्दी के मध्य में हुआ था और आज भी इसकी भव्य संरचना और सुंदर सजावट के लिए प्रसिद्ध है। मस्जिद के बाहरी हिस्से में सुंदर मosaics और संगमरमर के पैनल हैं, जो इसकी सुंदरता और शांति को बढ़ाते हैं। इसका सौन्दर्य और शांति का माहौल इसके लिए प्रसिद्ध है और इसका दौरा करना कश्मीर के सांस्कृतिक और धार्मिक पटल का एक अनुभव है।
अंजनम-ए-हैदरी इमाम बर्गाह मस्जिद का प्रवेश निकास के मध्य में स्थित है। इसकी सादगी और शांति की लुक में सुन्नी संस्कृति का प्रतिबिंब है। प्रात: के समय में यहां आना सबसे अच्छा है, जब सूरज की रोशनी में मस्जिद का सौन्दर्य सामने आता है। सादे और सावधानी से कपड़े पहनें और अपने साथ कुछ पानी और नमक लेकर आएं, क्योंकि मस्जिद के पास सुविधाएं नहीं हैं। सड़क मार्ग से यहां आना सबसे आसान है, जिसके लिए आपको अपने स्थान से निकास के मध्य में स्थित सड़क पर उतरना होगा। मस्जिद के निकट स्थित सड़क से उतरने के बाद, आपको कुछ दूरी का पैदल चलना होगा।
किसी की नमाज़ की आहट से भरा हुआ है अन्जुमन-ए-हайдरी इमाम बारगाह मस्जिद, जम्मू के दिल में स्थित। यहां की नमाज़ की प्रथा में सुन्नी स्कूल की प्रार्थना की विशेषताएं दिखाई देती हैं। साधारण नमाज़ से लेकर सालाना ताज़ा हस्ब-ए-रसूल की प्रार्थना तक, यहां के मुस्लिम साधारण नमाज़ की प्रथा में संलग्न होते हैं। साधारण नमाज़ के साथ-साथ सालाना ताज़ा हस्ब-ए-रसूल की प्रार्थना के लिए साधारण नमाज़ की प्रथा में संलग्न होते हैं।



