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हाजी अली दर्गा

हाजी अली दर्गा

📍 Near Maa Hajjani Masjid and Dargah, Mumbai

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Good to know

architect

Sunni Islam

Verified 23 Sept 2026

construction year

1431

Verified 23 Sept 2026

phone

+91-22-2352-9082

Verified 23 Sept 2026

website

https://www.hajialidargah.in/

Verified 23 Sept 2026

Story

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Tradition says

हाजी अली दर्गा के लिए स्थानीय विश्वास के अनुसार, यह मस्जिद मुंबई के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। लोकप्रिय मान्यता है कि इस मस्जिद का निर्माण हाजी अली शाह, एक सूफी संत ने किया था, जिसका जीवन कार्य और साधना के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हाजी अली शाह ने इस स्थान पर आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की थी, और इसके बाद से ही, यह मस्जिद मुंबई के लोगों के लिए एक पवित्र स्थान बन गया।

Historians say

हाजी अली दर्गा मुंबई के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध मस्जिद है। इसका नाम हाजी अली के नाम पर पड़ा है, जो एक सूफी संत थे। यह मस्जिद 17वीं शताब्दी की है और मुंबई के सबसे पुराने मस्जिदों में से एक है। हाजी अली दर्गा की विशेषता इसके सुंदर नक्काशी कार्य है, जिसमें सुंदर मोज़ाइक और संगीतमय साजो-सज्जा है। यह मस्जिद शाम को सूरज की रोशनी में सबसे सुन्दर दिखती है, इसलिए रात्रि में इसका दृश्य देखना चाहिए।

Historians say

हाजी अली दर्गा की सुंदर सीढ़ी और स्तूपों से घिरा हुई है। इस जगह की शांति और सुकून की स्थिति का लाभ उठाने के लिए, दिन के मध्य से लेकर शाम तक का समय सबसे अच्छा है। सुविधाजनक कपड़े और पानी के साथ जाने की सलाह दी जाती है। हाजी अली दर्गा मुंबई के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, और इसका सबसे आसान तरीका सीएसटी रोड से निकलने वाली बस से आना है। बस स्टॉप से निकलने के बाद, सड़क पर चलना होगा और कुछ ही मिनटों में दर्गा के प्रवेश द्वार को देखा जा सकता है। हाजी अली दर्गा का प्रवेश द्वार से पहले की स्थिति का लाभ उठाने के लिए, स्थानीय लोगों से पूछना होगा कि क्या किया जाना है।

Tradition says

हाजी अली दर्गा के प्राचीन प्रांगण में स्थित है, जहां सूफी संत हाजी अली की पूजा की जाती है। यहां स्थानीय लोगों की संस्कृति का एक प्रतिबिंब है, जिसमें सूफी संत की पूजा की जाती है, जिसमें संगीत, नृत्य और साहित्य का संगम होता है। हाजी अली दर्गा के प्रांगण में स्थित हाजी अली की मूर्ति की पूजा की जाती है, जिसमें सूफी संत की जीवनी और उनके सिद्धांतों का स्मरण किया जाता है।

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