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त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर की स्थानिक मान्यता है कि यह मंदिर देवी त्रिपुरेश्वरी की पूजा का केंद्र है। यह मंदिर उदयपुर के प्राचीन शहर में स्थित है, जो अगार्ताला से 55 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर पूर्वोत्तर भारत के सबसे पवित्र हिंदू श्राइनों में से एक है और सबसे अधिक आगंतुकों को आकर्षित करता है, कामाख्या मंदिर के बाद। त्रिपुरा का नाम इस मंदिर के नाम पर रखा गया है। मATABARI के नाम से जाना जाता है, जो एक छोटे से टर्टल के हump के ऊपर स्थित है। यह आकार कुरमपृष्ठाकृति के नाम से जाना जाता है, जो शक्ति मंदिर के लिए सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। देवी की पूजा tradicional ब्राह्मण पुजारी कर रहे हैं। यह मंदिर 51 शक्ति पीतों में से एक है, जिसके लिए मान्यता है कि सती का दायां पाद, जिसमें बड़ा अंगुली शामिल है, यहां गिरा था।
ट्रिपुरा सुन्दरी मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो देवी ट्रिपुरेश्वरी को समर्पित है, जो तीसरा महाविद्या और पार्वती की मुख्य रूप है। यह मंदिर उदयपुर के पुराने शहर में स्थित है, जो अगार्ताला से 55 किमी दूर है और अगार्ताला से ट्रेन और सड़क के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। यह मंदिर इस क्षेत्र के सबसे पवित्र हिंदू श्राइनों में से एक है और उत्तर-पूर्व भारत में सबसे अधिक सैलानियों को देखता है, कामाख्या मंदिर के बाद। ट्रिपुरा राज्य का नाम इसके कारण है। लोकप्रिय रूप से मATABARI के नाम से जाना जाता है, जो एक छोटे से हिल्लॉक पर स्थित है, जो एक टорт्यूज के कंधे के समान है। यह आकृति कुर्मपृष्ठाकृति कहलाती है, जो शक्ति मंदिर के लिए सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, इसलिए इसका नाम कुर्मपीठ भी है। देवी को tradicional ब्राह्मण पुजारी सेवा करते हैं। यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक है; लegend कहता
कुर्मपीठ पर स्थित मATABARI, त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर को दोपहर के समय में देखना सबसे अच्छा होता है, जब सूरज की रोशनी मंदिर की सुंदरता को और अधिक प्रकाशित करती है। मंदिर के लिए पहुँच के लिए स्थानीय साधनों का उपयोग करें और किसी भी पूछताछ के लिए स्थानीय लोगों से संपर्क करें। मंदिर के लिए प्रवेश के लिए स्थानीय नियमों की पुष्टि करें, क्योंकि समय और शुल्क स्थानीय स्थिति में बदलते हैं।
त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर में पूजा की प्रथा सामान्य रूप से देवी की पूजा से जुड़ी हुई है। यहां के साधुओं का मानना है कि देवी की पूजा से सभी पापों का नाश होता है। मंदिर में पूजा करने वाले साधुओं का मानना है कि देवी की पूजा से सभी संकटों का नाश होता है। साधुओं का मानना है कि देवी की पूजा से सभी संकटों का नाश होता है। मंदिर में पूजा करने के लिए साधुओं का मानना है कि देवी की पूजा से सभी संकटों का नाश होता है।




