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किले की सीढ़ी के नीचे स्थित है बाहू किला जम्मू के संगम से सटा हुआ संगम के तट पर। इसका निर्माण संगम के किनारे की सीढ़ी के नीचे स्थित है जिसका निर्माण संगम के किनारे की सीढ़ी के नीचे स्थित है। इसका निर्माण संगम के किनारे की सीढ़ी के नीचे स्थित है जिसका निर्माण संगम के किनारे की सीढ़ी के नीचे स्थित है।
काली माता के पूजन का स्थान है बाहू किला का। यहां के लोग मानते हैं कि किले के निर्माण के पीछे एक प्राचीन कहानी है, जिसके अनुसार किले का निर्माण एक साधु ने किया था, जो कि काली माता के भक्त थे। स्थानीय पूजा के अनुसार, किले में स्थित मंदिर में काली माता की पूजा की जाती है, जिसका नाम बावे वाली माता मंदिर है। (Translation: Bahu Fort is a place of worship of Goddess Kali. The locals believe that there is an ancient story behind the construction of the fort, according to which a saint built the fort who was a devotee of Goddess Kali. According to local worship, the temple situated within the fort premises is dedicated to the worship of Goddess Kali, known as Bawe Wali Mata Temple.)
कश्मीर के जम्मू शहर के मध्य स्थित बाहू किला एक प्राचीन किला है, जिसका निर्माण प्रमार राजपूतों ने तवी नदी के तट पर किया होगा। किले की स्थापना के बारे में कई संस्करण हैं, लेकिन एक संस्करण के मुताबिक इसका निर्माण बाहू लोचन ने किया था, जो जंबू लोचन के भाई थे। किले के भीतर एक काली देवी को समर्पित मंदिर है, जिसका नाम बावे वाली माता मंदिर है।
जम्मू के बाहू किले की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय दोपहर के करीब है, जब सूरज की रोशनी में स्थान की सुंदरता और इतिहास की कहानी सबसे अच्छे से सामने आती है। साफ कपड़े और कोमफर्टेबल शूज़ लेकर जाना अच्छा है, क्योंकि स्थान की चढ़ाई और सड़कें काफी लंबी हैं। स्थान की सड़कें काफी लंबी हैं, इसलिए पैदल चलने की कोशिश करें, क्योंकि वहां की सुंदरता और इतिहास की कहानी सबसे अच्छे से सामने आती है। स्थान की सड़कें काफी लंबी हैं, इसलिए पैदल चलने की कोशिश करें, क्योंकि वहां की सुंदरता और इतिहास की कहानी सबसे अच्छे से सामने आती है।




